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कविता है मां नज़र रहा है कवि है hindikavita मिलना झलक दिल में बसी रहती है हरदम कौन है बुढापा परिवार तो राम राज्य किसलिए है बसी है बेवजह ये दुनिया सारी है। संस्कार

Hindi बसी है Poems